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पुलिसकर्मियों की लुटेरी गैंग:व्यापारियों से ट्रेन में क्राइम ब्रांच बनकर 60 लाख रुपए की ठगी

बता दें कि ट्रेन में झांसी के व्यापारियों को राजस्थान क्राइम ब्रांच बनकर लूटने वाले गिरोह का मास्टर माइंड व्यापम कांड में निलंबित पुलिस जवान सतेन्द्र गुर्जर है। इसने अपने सायबर पुलिस के जवान अभिषेक तिवारी, विवेक पाठक और रेलवे पुलिस फोर्स के जवान योगेन्द्र के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया है। वारदात के दौरान MP पुलिस का निलंबित जवान क्राइम ब्रांच का ऑफिसर बना था। ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने पांच लोगों को अभी तक पकड़ा है। एक निलंबित जवान सतेन्द्र है, तीन साइबर और रेलवे पुलिस में पदस्थ हैं।
चौंकाने वाली बात ये है कि ठगी करने वाले आरोपी पुलिसकर्मी हैं।


ग्वालियर/मध्यप्रदेश।

आज तक आपने कई तरह की लूट के गैंग के बारे में सुना होगा लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आज हम ऐसी लुटेरी गैंग के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके मास्टरमाइंड चार पुलिसकर्मी हैं। दरअसल,ग्वालियर पुलिस ने झांसी उत्तर प्रदेश के 3 सराफा व्यापारियों से ट्रेन में डबरा-ग्वालियर के बीच हुई 60 लाख रुपए की लूट का खुलासा किया है। पूरी लूट को व्यापम कांड में निलंबित पुलिस जवान सतेन्द्र गुर्जर ने अपने साथियों MP और RPF के जवानों के साथ मिलकर अंजाम दिया है। वारदात फिल्मी अंदाज में हुई थी। सभी आरोपी राजस्थान क्राइम ब्रांच के जवान और अफसर बनकर जबलपुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस के कोच-2 में पहुंचे। व्यापारियों के नाम बुलाकर उनको सीट से उठाया। खुद को क्राइम ब्रांच का अफसर बताकर डराया और तलाशी के लिए बैग छीन लिए।
रुपए हवाला के बताकर जब्त कर चले गए। साथ ही व्यापारियों से आखिरी कोच में आने के लिए कह गए। इसके बाद न जवान मिले न रूपए। व्यापारियों ने लौटकर झांसी पुलिस को सूचना दी। ग्वालियर पुलिस ने CCTV कैमरे की फुटेज से पहचान कर 5 आरोपियों को पकड़ा है। इनमें से एक निलंबित जवान सतेन्द्र, दो साइबर पुलिस के जवान अभिषेक, विवेक व रेलवे पुलिस का जवान योगेन्द्र के साथ एक व्यापारी का चालक है। 27 लाख रुपए बरामद हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,उत्तर प्रदेश झांसी के बड़ा बाजार निवासी सराफा व्यापारी 42 वर्षीय राकेश पुत्र शंकरलाल अग्रवाल का काम स्थानीय सराफा बाजार के व्यापारियों से रुपए लेकर दिल्ली से उनको डिजाइनर ज्वेलरी लाने का काम करते हैं। जिस पर उनका फिक्स कमीशन होता है। उनके साथ ही सागर अग्रवाल और संजय गुप्ता भी यही काम करते हैं। बीते 25 साल से वह इस व्यवसाय में है। 17 जून को यह तीनों झांसी से दिल्ली जाने के लिए जबलपुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर-02181) में सवार हुए। दो बैग में 30-30 लाख रुपए रखे हुए थे। वह ट्रेन को कोच-2 की सीट नंबर-1,15,9 पर सफर कर रहे थे। डबरा निकलते ही चार लोग इनके पास आए। उनको तीनों व्यापारियों के नाम पता था। नाम लेकर उन्होंने तीनों व्यापारियों को बुलाया। चारों युवकों ने खुद को राजस्थान क्राइम ब्रांच का जवान और अफसर बताया। साथ ही बताया कि सूचना मिली आप लोग हवाला का पैसा यहां से वहां करते हो। व्यापारी घबरा गए। चारों युवकों ने उनसे उनके तीनों बैग छीन लिए। दो बैग में करीब 60 लाख रुपए मिले, एक खाली था। बैग को जब्त कर चारों युवक ग्वालियर स्टेशन के पास अगले कोच में चले गए। व्यापारियों से कहा पूरी जांच के बाद रुपए मिलेंगे। आगे आखिरी कोच में अफसर बैठे हैं वहां आ जाना। घटना से व्यापारी घबरा गए। रुपयों का कोई रिकॉर्ड उनके पास नहीं था। इसके बाद वह दिल्ली पहुंचे और लौटकर झांसी आकर मामले की सूचना व्यापारियों को सूचना दी। वहां से झांसी पुलिस और वहां से ग्वालियर पुलिस को सूचना दी गई। इसमें क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी। जब चार आरोपी हाथ आ गए तो शनिवार (3 जुलाई) को GRP ग्वालियर में मामले की FIR दर्ज की गई है।

कैसे हुआ मामले का खुलासा

एसपी ग्वालियर अमित सांघी ने क्राइम ब्रांच को मामले की जांच में लगाया। पुलिस ने झांसी स्टेशन से लेकर ग्वालियर और डबरा स्टेशन के फुटेज चेक किए। इसके बाद एक निलंबित जवान सतेन्द्र तीन अन्य के साथ दिखा। उसके पास बैग भी थे। यहीं से पुलिस ने कड़ी से कड़ी जोड़कर पूरे मामले का खुलासा किया है।
बदमाशों को व्यापारियों के कैश लेकर निकलने की टिप इनमें से एक व्यापारी के ड्राइवर ने दी थी। कुछ समय पहले लापरवाही के चलते व्यापारी ने उसे काम से निकाल दिया था। जिससे वह खफा था। यह वाहन सतेन्द्र के टच में था। इसने पूरी योजना समझाकर निलंबित जवान को टिप दी थी।

पुलिस अधीक्षक ग्वालियर की वीडियो देखें

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