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सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर मांगीलाल ने! माँगी रिश्वत,लोकायुक्त ने 10 हजार लेते रंगे हाथों दबोचा

बता दें कि शिकायत कर्ता पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन को शिकायत आवेदन दिया था कि उसने सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया शाखा अलोट जिला रतलाम से केसीसी लोन स्वीकृत कराया था। जब वह लोन के लिए बैंक गया तो बैंक मैनेजर मांगीलाल चौहान द्वारा उससे लोन स्वीकृत कराने के नाम पर 15 हज़ार रुपये की रिश्वत मांगी।


रतलाम/उज्जैन/मप्र।

कहते हैं यथा नाम तथा गुण लेकिन कभी-कभी नाम के अनुरूप गुणों का अनुसरण करने पर लेने के देने पड़ जाते है ऐसा ही कुछ हुआ बैंक मैनेजर मांगीलाल चौहान के साथ।
दरअसल,मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारियों पर लोकायुक्त का शिकंजा कसने की कार्रवाई लगातार जारी है। लगभग रोजाना कोई कोई अधिकारी कर्मचारी प्रदेश में रिश्वत लेते हुए पकड़ा जा रहा है। लेकिन हैरानी की बात है कि इससे बाद भी रिश्वतखोरी खत्म होते नजर नहीं आ रही है। ताजा मामला रतलाम के आलोट का है जहां सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के मैनेजर मांगीलाल (एमएल) चौहान को रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने रंगेहाथों गिरफ्तार किया है। लोकायुक्त उज्जैन ने बैंक मैनेजर चौहान के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। टीम द्वारा बैंक मैनेजर से पूछताछ कर कागजी कार्रवाई की जा रही है।

क्या है पूरा मामला

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार,किसान बालू सिंह रेवड़िया पुत्र रामचंद्र रेवड़िया निवासी ग्राम भीम से किसान क्रेडिट कार्ड लोन की राशि स्वीकृति करने के लिए बैंक के मैनेजर चौहान ने 15 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। किसान बालू सिंह का लोन पास भी कर दिया गया था लेकिन जब वह बैंक में रुपये निकलवाने गया, उस समय बैंक मैनेजर चौहान द्वारा उससे रिश्वत की मांग की गई। इसकी शिकायत उसने लोकायुक्त पुलिस एसपी उज्जैन को की थी। एसपी के निर्देश पर टीम ने जांच कर घेराबंदी की।
शुक्रवार दोपहर किसान बालू सिंह ने बैंक मैनेजर चौहान को जाकर रुपये दिए, तभी आसपास छुपकर खड़े टीम के सदस्यों ने इशारा मिलते ही मैनेजर चौहान को हिरासत में ले लिया। लोकायुक्त पुलिस ने उससे रिश्वत की राशि जब्त कर ली।
किसान बालू सिंह ने बताया कि केसीसी लोन सिक्योरिटी के पश्चात 15 हजार रुपये की रिश्वत की मांग शाखा प्रबंधक चौहान ने की थी। ऋण भी स्वीकृत कर दिया था। वह रुपये निकालने गया तब बैंक मैनेजर ने 15 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत पर उज्जैन लोकायुक्त के निरीक्षक राजेंद्र वर्मा व बलवीर सिंह यादव टीम के साथ बैंक की घेराबंदी कर योजनाबद्ध तरीके से चौहान को 10 हजार की रिश्वत लेते हैं रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

केबिन में बैठकर ले रहे थे रिश्वत

लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और रिश्वत के 10 हजार रुपए लेकर फरियादी बालू सिंह को मैनेजर मांगीलाल चौहान के पास भेजा। मैनेजर मांगीलाल ने जैसे ही बैंक स्थित अपने केबिन में बालू सिंह से रिश्वत के पैसे लिए तभी लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया।


जबलपुर लोकायुक्त ने 15 हज़ार की रिश्वत लेते हुए पटवारी को रंगे हाथों दबोचा


पटवारी कौशल किशोर राजपूत लाल घेरे में

सिवनी/मध्यप्रदेश।

मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के धनोरा तहसील में पदस्थ पटवारी को 15 हजार की रिश्वत लेते जबलपुर लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार को दबिश देते हुए रंगे हाथ पकड़ा है।
दरअसल,जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर धनौरा तहसील के देवरी टीका में पदस्थ हल्का पटवारी कौशल किशोर राजपूत को विशेष स्थापना दल लोकायुक्त जबलपुर ने शुक्रवार दोपहर को धनौरा स्थित पटवारी कार्यालय में 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। वही आगे की कार्रवाई की गई।

क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,पैतृक जमीन का बंटवारा करवाने के एवज ने पटवारी ने 30 हजार रुपयों की मांग की थी। इसकी शिकायत तहसील केवलारी अंतर्गत केवलारी गांव निवासी पीड़ित शेख पीर पुत्र शेख हाफिज कुरैशी ने जबलपुर लोकायुक्त में की थी। शिकायत के तथ्यों को परखने के बाद शुक्रवार को जाल बिछाकर रिश्वत के 15 हज़ार रुपये लेकर धनौरा स्थित हल्का पटवारी कार्यालय में देवरीटीका में पदस्थ पटवारी कौशल किशोर राजपूत के पास भेजा गया है। रिश्वत के रुपये लेते ही पीछे से मौके पर पहुंची लोकायुक्त जबलपुर के दल ने पटवारी को गिरफ्तार कर लिया। डीएसपी जेपी वर्मा के नेतृत्व में आठ सदस्यीय लोकायुक्त दल ने कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें निरीक्षक रंजीत सिंह राजपूत सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

इनका कहना

डीएसपी जेपी वर्मा ने बताया कि बड़े भाई की मृत्यु होने पर प्रार्थी शेख पीर कुरैशी ने पैतृक जमीन का बंटवारा करने जुलाई 2021 में आवेदन दिया था। जमीन का बंटवारा करने के लिए पटवारी ने प्रार्थी से 30 हजार रुपये मांगे थे। प्रार्थी ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने का हवाला दिया था, जिसके बाद दोनों के बीच 15 हजार रुपये में सौदा तय हो गया था। इस मामले की शिकायत 7 फरवरी 2022 को प्रार्थी ने जबलपुर लोकायुक्त में दर्ज कराई थी। जांच में शिकायत की पुष्टि होने पर पटवारी को पकड़ने जाल बिछाया गया।

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