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विनम्र श्रद्धांजलि:वैक्सीन के दो डोज लगने के बाद भी,प्रधान आरक्षक की कोरोना से मौत

इंदौर/मध्यप्रदेश।

मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में कोरोना संक्रमण से पुलिस कंट्रोल रूम रेडियो (पलासिया) में पदस्थ प्रधान आरक्षक विकास कोरड़े की इलाज के दौरान मौत हो गई है। वे ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमित हुए थे और 24 अप्रैल को एमटीएच अस्पताल में भर्ती किया गया था। 80 प्रतिशत फेफड़े में संक्रमण पहुंच चुका था। वर्तमान में जिले में इस वर्ष कुल 710 पुलिसकर्मी संक्रमित हुए थे। करीब 155 संक्रमित पुलिसकर्मी ठीक होकर पुन: मैदान में आ गए हैं।

पूरा परिवार संक्रमण की चपेट में,पत्नी की जान बचाने के लिए गर्भपात कराना पड़ा

प्राप्त जानकारी के अनुसार,विकास की पत्नी दीपाली कोरड़े, पिता उत्तमराव कोरड़े और माता उमा कोरड़े भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए थे। पत्नी दीपाली छह माह की गर्भवती थी, जिन्हें एमटीएच अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान जब उनकी हालात गंभीर हो गई तो जान बचाने के लिए गर्भपात करवाना पड़ा। इनका पांच साल का बेटा भी है। विकास के छोटे भाई जयंत कोरड़े भी स्पेशल आर्म्स फोर्स 32 बटालियन उज्जैन में पदस्थ हैं। उन्होंने बताया कि भाई को कोविशील्ड के दोनों डोज लग चुके थे, लेकिन इसके बावजूद भी वे संक्रमित हो गए और 3 मई को उनकी मौत हो गई। परिवार में सभी कोरोना संक्रमित होने के बाद परिवार को संभालने के लिए वे खुद पिछले 25 दिनों से परिवार के साथ हैं।

9 अप्रैल 2020 को इंस्पेक्टर देवेंद्र चंद्रवंशी का हुआ था निधन

45 वर्षीय थाना प्रभारी का 19 अप्रैल को निधन हो गया था। इंस्पेक्टर देवेंद्र चंद्रवंशी जूनी इंदौर थाने के प्रभारी थे। वे 19 दिन से अरविंदो अस्पताल में भर्ती थे। टीआई चंद्रवंशी की पहली कोरोना रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई थी, लेकिन बाद में 13 और 15 अप्रैल की रिपोर्ट निगेटिव आईं। अस्पताल प्रबंधन के प्रमुख डॉ. विनोद भंडारी का कहना था कि चंद्रवंशी की मौत का मुख्य कारण पल्मोनरी एम्बोलिज्म रहा। चंद्रवंशी के निधन के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने परिवार को 50 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया था। साथ ही पत्नी को सब इंसपेक्टर के पद पर नियुक्ति देने की घोषणा भी की थी।

इंदौर में टीआई पाल ने अंतिम सांस ली थी

कोरोना संक्रमण के शिकार होकर जान गंवाने वाले उज्जैन ​​​​​​​नीलगंगा इलाके के तत्कालीन थाना प्रभारी यशवंत पाल (59) 10 दिन इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल में भर्ती रहे। पाल सीएए के खिलाफ उज्जैन के बेगमबाग में चल रहे धरने में लंबे समय से ड्यूटी कर रहे थे। फिर कोरोना संक्रमित क्षेत्र अंबर कॉलोनी में ड्यूटी की। तबीयत बिगड़ने पर दवाएं लेकर फर्ज निभाते रहे। 6 अप्रैल को संक्रमण की पुष्टि हाेने के बाद उन्हें आरडी गार्डी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 6 दिन बाद इंदौर शिफ्ट किया गया। 21 अप्रैल को सुबह 5.45 बजे वे शहीद हो गए। पाल की पत्नी मीना पाल तहसीलदार हैं। छोटी बेटी ईशा अभी पढ़ाई कर रही हैं।

इनका कहना

डॉक्टर राजेश का कहना ऐसे केस में लापरवाही सबसे प्रमुख कारण है। क्योंकि अमूमन देखा गया है कि पहले वैक्सीन होने के बाद यदि व्यक्ति को कोई लक्षण दिखाई देते हैं तो वह उसे इग्नोर करने लगता है। इसके कारण वायरस हावी होते जाता है। दो डोज लगने के बाद यदि मौत हुई है और 80% संक्रमण है तो लक्षण रहे होंगे। वैक्सीन लगाने के बाद व्यक्ति को जो प्रारंभिक लक्षण कोरोना के सर्दी जुखाम बुखार आना इसे उसने इग्नोर किया होगा।

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