मंडला/जबलपुर/मप्र।
मध्यप्रदेश में जेल में बंद कैदियों के इलाज के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही है। इसका सनसनीखेज खुलासा गुरुवार को हुआ। दरअसल,जिला जेल के कमांडर को एक विचाराधीन कैदी के पथरी के इलाज के लिए रिश्वत मांगना महंगा पड़ गया। 7 हजार की रिश्वत लेते जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने जिला जेल के कंपाउंडर आरोपित मनोज डोंगरे पिता महिपाल डोंगरे को रंगे हाथ पकड़ा लिया। पीड़ित से 5 हजार रुपए जेलर के नाम पर और 2 हजार अपने लिए रिश्वत मांगी थी। यह कार्रवाई जबलपुर लोकायुक्त ने रेडक्रॉस भवन के पास मंडला में की है। आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने में निरीक्षक घनश्याम सिंह मर्सकोले, कमल सिंह उईके, भूपेंद्र दीवान, रंजीत सिंह एवं आरक्षक अमित मंडल, अमित गावड़े, शरद एवं जीत सिंह इस कार्रवाई में शामिल रहे।
क्या है पूरा मामला,पथरी का इलाज कराने ली थी रिश्वत

प्राप्त जानकारी के अनुसार,लोकायुक्त एसपी अनिल विश्वकर्मा का कहना है कि जंतिपुर मंडला निवासी रवींद्र पटेल, पिता कंछेदी पटेल ने 17 अगस्त को मामले की शिकायत की थी। बताया कि उसके जीजा संजय सिंगौर मंडला जेल में विचाराधीन बंदी हैं। संजय को मंडला कोतवाली ने धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया था। वे पथरी से पीड़ित हैं और जेल अस्पताल में ही उनका इलाज चल रहा है। रवींद्र ने बताया कि मंडला जेल का कंपाउंडर मनोज डोंगरे पथरी का इलाज कराने और समय पर दवा देने के एवज में 7 हजार रुपए रिश्वत मांग रहा है। रवींद्र की शिकायत पर लोकायुक्त एसपी विश्वकर्मा ने आरोपी से उसकी बातचीत को ट्रैप कराया।

आरोपी मनोज ने पीड़ित रवींद्र को सात हजार रुपये के साथ गुरुवार (19 अगस्त) की सुबह 11.30 बजे रेडक्रास के पास मंडला में बुलाया था। वहां जैसे ही आरोपी ने रिश्वत के सात हजार रुपए जेब में रखा। मौके पर मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे धरदबोचा। आरोपी ने रुपये फेंक कर भागने की कोशिश भी की लेकिन लोकायुक्त टीम ने उसे पकड़ लिया। मौके पर ही उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का प्रकरण दर्ज करते हुए आवश्यक कार्रवाई की। फिर उसे मौके पर ही जमानत पर छोड़ दिया।
