बता दें कि युवक रोज अखबार पढ़ता था। वह लिखता भी था, लेकिन उसके द्वारा लिखी गई अजीब सी लिपि को कोई पढ़ नहीं पाता था। इसके लिए गूगल की मदद भी ली गई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। वह अपने घर और परिवार के बारे में इशारों में बताता था, समझाने की कोशिश भी करता था पर किसी की कुछ समझ में नहीं आता। वहीं अब गजानंद कांस्टेबल के परिवार के साथ बहुत खुश था। कांस्टेबल की पत्नी और उनके बच्चे अक्षय, पायल और गिर्राज के साथ गजानंद भी खूब मस्ती करते थे।
राजगढ़/मध्यप्रदेश।
बजरंगी भाईजान फिल्म में जिस तरह सलमान बच्ची को अपने घर में परिवार की तरह रखते हैं, उसी तरह कैलाश ने भी किया। बिहार के सीवान का एक मूक बधिर युवक पिछले दस साल से अपने परिवार से बिछड़कर भटक रहा था। दरअसल,मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा सिटी पुलिस थाने के कांस्टेबल कैलाश नायक एक मूकबधिर युवक को उसके परिजनों से मिलाने के प्रयास में लगे हुए थे। करीब 8 माह पहले ड्यूटी कर रहे कांस्टेबल को मुक बधिर युवक मिला। पता और परिजनों की जानकारी नहीं मिलने पर कांस्टेबल युवक को अपने घर ले आए। कांस्टेबल की पत्नी ने युवक का नाम गजानंद रख दिया था।

क्या है पूरा मामला,इस तरह गजानंद से मिले कांस्टेबल कैलाश

प्राप्त जानकारी के अनुसार,जिले के ब्यावरा सिटी पुलिस थाने के कांस्टेबल कैलाश नायक आठ महीने ब्यावरा के पीपल चौराहे पर ड्यूटी दे रहे थे, इसी दौरान उन्हें बताया गया की एक युवक भूखा प्यासा यहां बैठा हुआ है और कुछ बोल भी नहीं पा रहा। कांस्टेबल युवक को लेकर थाने आ गए। लेकिन युवक मूकबधिर होने से अपना कोई पता नहीं बता सका। पुलिस ने कई प्रयास किए लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। ऐसे में कांस्टेबल कैलाश युवक को अपने घर ले गए और पत्नी और बच्चों को पूरा मामला बताया। युवक जिसकी उम्र लगभग 20 वर्ष से ज्यादा है, को देखकर कांस्टेबल की पत्नी और बच्चे भी बहुत खुश हुए। युवक को कांस्टेबल बुधवार के दिन अपने घर ले गए तो पत्नी ने युवक का नाम गजानंद रख दिया और उसे अपने परिवार का हिस्सा मान लिया। उसके बाद कांस्टेबल युवक के घरवालों को ढूंढ़ने में लगे थे, जो न कुछ बोल पा रहा है, न सुन सकता है। इस युवक को लेकर वे कई थानों के चक्कर लगा चुके हैं और दूसरी तमाम कोशिशें भी कर लीं लेकिन सफलता नहीं मिली। इस युवक के घर और परिवार का पता लगाने के लिए कैलाश उसे आधार सेंटर पर भी लेकर गए। उन्होंने युवक के फिंगर प्रिंट का मिलान कराकर आधार ट्रेसिंग करवाई, लेकिन सफलता नहीं मिली। कैलाश ने बताया कि कई राज्यों के पुलिस थानों में और अपने मित्रों को उन्होंने युवक के फोटो भेजे थे। अब अन्य राज्यों के ट्रक ड्राइवरों की मदद भी ले रहे थे, उन्हें युवक का फोटो दिखाकर उसका पता ढूंढने की कोशिश कर रहे थे।
इस तरह सफल हुए कैलाश

कांस्टेबल ने तय कर लिया था कि युवक को किसी भी हाल में उसके घर वालों से मिलवा कर रहेंगे, इसको लेकर कांस्टेबल हाईवे पर ड्यूटी के दौरान युवक के फोटो को हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को दिखाकर उसका पता खोजने में लगे रहे, सभी पुलिस थानों पर युवक का फोटो भेजकर तलाश में जुटे थे, इसी बीच बिहार के सीवान जिले की पुलिस से पता चला कि बिलासपुर का एक मूक बधिर युवक लापता है। इसके बाद युवक का फोटो भेजा गया तो माता-पिता ने पहचान लिया। पहचान के बाद युवक के परिजन ब्यावरा आकर उसे अपने साथ ले गए।
युवक के परिजनों की तलाश में जुटे कांस्टेबल कैलाश नायक को लोग बजरंगी भाईजान के नाम से पुकारने लगे और कांस्टेबल ने अपनी मेहनत से एक मूक बधिर युवक को उसके परिजनों से मिला दिया।
