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देशभक्ति जनसेवा: हाईटेक इस युग में,क्या 5₹ भोजन और नाश्ता भत्ता बढ़ाकर मजाक कर रही है सरकारें

देश भक्ति,जन सेवा का भाव मन में लेकर पुलिस की ड्यूटी करने आये जवानों का ये भाव तब दम तोड़ देता है जब थाने में आरक्षक व प्रधान आरक्षकों को गश्त व डाक ले जाने के लिए 18 रुपए साइकिल खर्च के मान से पेट्रोल खर्च दिया जाता है। जबकि एसआई, एएसआई को जांच के लिए खुद की गाड़ी में स्वयं के पैसे का पेट्रोल फूंकना पड़ता है। यह भत्ता भी वेतन के साथ ही जुड़कर आता है।



भोपाल/मध्यप्रदेश………….


जनता की सुरक्षा में चौबीस घंटे ड्यूटी करने वाले पुलिस जवानों को पांच साल बाद सरकार ने नाश्ते व भोजन में सिर्फ 5 रुपए की बढ़ोतरी की है। गृह मंत्रालय से जारी आदेश में पुलिसकर्मियों के नाश्ते व भोजन में बढ़ोतरी हुई है। 2013 से पुलिसकर्मियों को नाश्ते पर 15 रुपए व भोजन पर 45 रुपए मिलते थे।

सरकार ने आदेश में संशोधन कर नाश्ते पर 15 से बढ़ाकर 20 व भोजन पर 45 से बढ़ाकर 50 रुपए किए हैं। सरकार ने आदेश में सिर्फ भोजन व नाश्ते पर ही बढ़ोतरी की है। बाकी नियम व शर्त यथावत रखी यानी हाइटेक जमाने में भी पुलिस को कागजों में साइकिल पर गश्त बता उसी मान से भत्ता दिया जाता है।


दिनरात ड्यूटी फिर भी भत्ता इतना कम…………


पेट्रोल : गश्त के लिए सिर्फ 18 रुपए, अभी पेट्रोल के दाम 82 रुपए प्रति लीटर से ज्यादा है।


डीजल : सरकारी वाहन में हर माह लगभग 240 लीटर डीजल डलवाया जाता है। जबकि लंबी ड्यूटी या अन्य सरकारी कामों में इससे ज्यादा ईंधन लग जाता है। 240 लीटर के ऊपर का ईंधन खर्च पुलिस को अपनी जेब से भुगतना पड़ता है।


वर्दी : बूट पॉलिश, वर्दी धुलाई के नाम पर सिर्फ 60 रु. मिलते हैं। जबकि पहले वर्दी और जूते विभाग ही देता था। अब वर्दी के नाम पर सालाना मात्र 400 रुपए दिए जाते हैं।


ट्रेवलिंग : सभी को अलग-अलग मान से टीए-डीए दिया जाता है। इसमें राज्य के अंदर जाने के लिए 125 व दूसरे राज्य में आने जाने के लिए 200 रुपए दिए जाते हैं।


खाना व नाश्ता : इसमें अब 5-5 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। नाश्ते के 15 से बढ़ाकर 20 व भोजन के 45 से बढ़ाकर 50 रुपए कर दिए हैं।


मकान : मकान किराया पुलिसकर्मियों को जेब से चुकाना पड़ता है। क्योंकि विभाग हाउस एलाउंस के नाम पर मात्र 350 रुपए देता है।


No1 Police डॉट कॉम की अपील………..???????


जरा विचार कीजिये………


क्या इन विषम परिस्थितियों के बाद भी सारा दोष पुलिसकर्मियों को देना उचित है। क्या इतने सीमित संसाधनों में 24 घंटे कोलू के बैल की तरह ड्यूटी करते हुए अपने ईमान पर कायम रह सकतें है।

क्या ईमान की राह पर परिवार का भरण पोषण संभव है??

-आज समाज वा देश की सरकार को इस विभाग की बदहाल होती व्यवस्था पर विचार करने की अत्यंत आवश्यकता है।


-हाईटेक इस जमाने में बाबा आदम के समय के भत्ते से क्या अपराध वा अपराधियों पर नकेल कसना संभव।


-यह एकमात्र ऐसा विभाग है जो अपने साथ होते अन्याय को चुपचाप सहते हुए अपने कर्तव्यों को निरंतर निभाता जा रहा है।

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