दतिया कोर्ट ने तत्कालीन सिनावल थाना प्रभारी अरविंद भदौरिया समेत 4 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। बिना वारंट घर में घुसकर महिलाओं-बच्चों से मारपीट के आरोप में कोर्ट ने नाराजगी जताई है। अब CCTV सबूतों की जांच होगी।
कोर्ट ने दतिया के पूर्व एसएचओ समेत चार पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जज ने 16 जून तक कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी है।
दतिया/मध्यप्रदेश।
दतिया जिले में पुलिसकर्मियों पर लगे गंभीर आरोपों के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।
एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले में जेएमएफसी न्यायालय ने सिनावल के तत्कालीन थाना प्रभारी अरविंद सिंह भदौरिया सहित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश राजघाट कॉलोनी में एक परिवार के घर में कथित तौर पर जबरन घुसकर मारपीट करने के मामले में दिया गया है।
वर्तमान में अरविंद भदौरिया थरेट में थाना प्रभारी हैं।
तत्काल प्रकरण दर्ज करने के निर्देश
जज विजिताश्व पुष्कर ने कोतवाली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस मामले में तत्काल प्रकरण दर्ज किया जाए। अदालत ने 16 जून तक कार्रवाई की स्थिति रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि आदेश के पालन में किसी प्रकार की देरी या लापरवाही बरती जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 27 मार्च 2024 की बताई जा रही है। दतिया के रावरी निवासी युवराज सिंह बुंदेला का परिवार राजघाट कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहा था। अधिवक्ता विवेक सिंह जाट ने अदालत को बताया कि घटना के दिन तत्कालीन SHO अरविंद सिंह भदौरिया, हेड कांस्टेबल पुष्पराज सिंह जौहरिया, आरक्षक कपिल शर्मा और महिला आरक्षक पूजा सिकरवार ने युवराज सिंह बुंदेला और उनके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की थी।
पीड़ित परिवार ने पहले पुलिस विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद युवराज सिंह बुंदेला ने जेएमएफसी न्यायालय में परिवाद दायर किया, जिसमें वर्दी की आड़ में कथित अपराध करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की गई थी।
बिना वारंट घरेलू गोपनीयता भंग करना कानून के खिलाफ
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि बिना वारंट घरेलू गोपनीयता भंग करना कानून के खिलाफ है। अदालत ने CCTV फुटेज, डिजिटल सबूतों और अन्य साक्ष्यों की जांच के निर्देश दिए। कोर्ट ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। यह फैसला पुलिस की जवाबदेही को मजबूत करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भी बिना वारंट घरेलू प्रवेश को गैरकानूनी माना गया है। इस मामले में अदालत ने कानून की सर्वोच्चता स्थापित की है।
केस दर्ज कर रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करेगी
कोर्ट ने आवेदन स्वीकार करते हुए कोतवाली पुलिस को तत्कालीन SHO अरविंद सिंह भदौरिया, हेड कांस्टेबल पुष्पराज सिंह जौहरिया, आरक्षक कपिल शर्मा और महिला आरक्षक पूजा सिकरवार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। अब कोतवाली पुलिस को नियमानुसार केस दर्ज कर निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी स्थिति रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।
मध्य प्रदेश पुलिस की छवि पर सवाल
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर पुलिस की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों में खाकी वर्दी के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है। अदालत के आदेश के बाद थाना कोतवाली पुलिस FIR दर्ज कर जांच शुरू करेगी। यदि लापरवाही हुई तो अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। यह फैसला पूरे मध्य प्रदेश के लिए मिसाल बन सकता है, जहां पुलिस की मनमानी पर अंकुश लगाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
