बता दें कि कोर्ट ने बृजवंशीलाल रजक उर्फ अशोक की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा- इस मामले दो पुलिसकर्मियों पर जुर्माना लगाया गया और इंस्पेक्टर मोनिका मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच की अनुशंसा की गई है। हाई कोर्ट ने एसपी दतिया को निर्देश दिया कि वे इंस्पेक्टर मोनिका के खिलाफ आईजी चंबल द्वारा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दो सप्ताह में पेश करें। ये रिपोर्ट भी प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
दतिया/ग्वालियर/मप्र।
हत्या के मामले में अधूरी केस डायरी पेश करने पर हाई कोर्ट ग्वालियर ने दतिया पुलिस को चेतावनी दी है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि भविष्य में दतिया में पदस्थ किसी भी पुलिसकर्मी ने अधूरी केस डायरी (जरूरी कागजात को रोकते हुए) भेजी तो यह कोर्ट उसके खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी कर सकती है।
क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार,हत्या के एक केस में पुलिस थाना भांडेर (दतिया) में 10 मई 2024 को दिनेश कुमार ने एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि चिरगांव चुंगी स्थित चवकी पर आटा लेने गए भगवान सिंह पर अरविंद, अशोक और आशीष रजक ने लाठियों से हमला किया। थोड़ी देर बाद आशीष ने 20 किलो के बांट से उनके सिर पर हमला किया, जिससे भगवान सिंह की मौत हो गई।
12 मई 2024 को पुलिस ने अशोक को गिरफ्तार किया। 22 जुलाई 2024 को सत्र न्यायालय ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। हाई कोर्ट में जमानत सुनवाई के दौरान चोटों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए केस डायरी मांगी गई, जिसमें नक्शा पंचायतनामा अधूरा पाया गया।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए प्रधान आरक्षक मंशाराम को निलंबित कर 5000 जुर्माना लगाया। एसएचओ भांडेर और एसआई भास्कर शर्मा पर 10 हजार का हर्जाना लगाया गया। इसी मामले में हुई जांच में इंस्पेक्टर मोनिका मिश्रा की भी प्रथमदृष्टया लापरवाही मानी गई है। इसी आधार पर उनके खिलाफ विभागीय जांच की अनुशंसा की गई है।
