●दिल्ली में पीएम मोदी और शाह से सिंधिया की बैठक।
●बैठक के बाद सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया।
●मोदी कैबिनेट में मंत्री बन सकते हैं सिंधिया।
नई दिल्ली……………
मध्यप्रदेश के राज परिवार से आने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ही पार्टी यानी कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका दिया है।
मुख्यमंत्री कमलनाथ से नाराज चल रहे सिंधिया ने मंगलवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। सिंधिया ने खुद ट्वीट कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी है।
हालांकि, इस पर तारीख 9 मार्च दर्ज है। यानी वे इसे एक दिन पहले ही लिख चुके थे।सिंधिया के फैसले पर मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने सिंधिया पर तंज कसा। यादव ने लिखा- ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा अपनाए गए चरित्र को लेकर मुझे जरा भी अफसोस नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम के समय उनके खानदान ने अंग्रेजों का साथ दिया था।
सिंधिया के इस्तीफे के बाद उनके खेमे के 6 मंत्रियों सहित 19 कांग्रेस विधायकों ने भी इस्तीफे दे दिए हैं।
इन 19 विधायकों ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल को अपने इस्तीफे भेज दिए हैं। इन इस्तीफों के साथ ही कमलनाथ सरकार के जाने की पटकथा फाइनल हो गई है।

इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। सिंधिया के इस फैसले को कांग्रेस ने गद्दारी बताया है।
इस्तीफे से पहले पीएम मोदी से साथ बैठक………….
इस्तीफा देने से पहले सिंधिया दिल्ली में सुबह अपने आवास से निकलकर सीधे गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे और इसके बाद शाह के साथ ही वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पहुंच गए। पीएम के आवास पर सिंधिया की बैठक सुबह 10.45 बजे शुरू हुई।
करीब एक घंटे तक पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच बैठक चली। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद सिंधिया अमित शाह की कार में बैठकर ही बाहर निकले। इससे पहले सिंधिया अपने आवास से अकेले खुद कार चलाकर अमित शाह के घर पहुंचे थे, जहां से अमित शाह के काफिले में लोक कल्याण मार्ग पर पीएम आवास पहुंचे। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
अरुण यादव ने क्या कहा………???????

ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा अपनाए गए चरित्र को लेकर मुझे ज़रा भी अफसोस नहीं है ।
सिंधिया खानदान ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी जिस अंग्रेज हुकूमत और उनका साथ देने वाली विचारधारा की पंक्ति में खड़े होकर उनकी मदद की थी,
दूसरे ट्वीट में अरुण यादव ने लिखा सिंधिया खानदान ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी जिस अंग्रेज हुकूमत और उनका साथ देने वाली विचारधारा की पंक्ति में खड़े होकर उनकी मदद की थी,आज ज्योतिरादित्य ने उसी घिनौनी विचारधारा के साथ एक बार पुनः खड़े होकर अपने पूर्वजों को सलामी दी है।
तीसरे ट्वीट में अरुण यादव ने लिखा-आने वाला वक़्त अपने स्वार्थों के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के 15 वर्षों तक किए गए ईमानदारी पूर्ण जमीनी संघर्ष के बाद पाई सत्ता को अपने निजी स्वार्थों के लिए झोंक देने वाले जयचंदों – मीर जाफरों को कड़ा सबक सिखाएगा।
पटवारी ने भी तंज कसा…………

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफे पर पार्टी नेताओं में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। सबने एक सुर से 1857 की घटना और फिर 1967 में मध्य प्रदेश में संविद सरकार बनने की घटना और सिंधिया परिवार के इतिहास पर उंगली उठायी। एक के बाद एक कांग्रेस नेताओं ने ट्विट किया और अपनी प्रतिक्रिया दी।
कमलनाथ सरकार में मंत्री जीतू पटवारी ने अपने ट्वीट में लिखा-एक इतिहास बना था 1857 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान से, फिर एक इतिहास बना था 1967 में संविद सरकार से और आज फिर एक इतिहास बन रहा है। इन तीनों में यह कहा गया है कि हां हम हैं।
कांग्रेस नेता केके मिश्रा का भी विवादास्पद ट्वीट……….

