POCSO एक्ट में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद अब 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामलों में मौत की सज़ा होगी देश भर पिछले कुछ समय से इसको लेकर सख्त कानून बनाए जाने की मांग हो रही थी आइए जानते हैं कि आखिर क्या है POCSO एक्ट?
नई दिल्ली…….
मोदी सरकार ने छोटी बच्चियों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए यह कड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कैबिनेट ने शनिवार को हुई बैठक में पॉक्सो एक्ट में संशोधन को मंजूरी दे दी है। अब सरकार द्वारा 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों में दोषियों को मृत्युदंड का प्रावधान करने के लिए अध्यादेश लाया जाएगा।
वही कैबिनेट ने 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से दुष्कर्म को लेकर भी प्रावधान का प्रस्ताव रखा है।
दरअसल, आज शनिवार को प्रधानमंत्री आवास पर करीब ढाई घंटे चली कैबिनेट बैठक के बाद अध्यादेश लाने को मंजूरी दी गई। अभी प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट (पॉक्सो) के तहत कम से कम सात साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा का प्रावधान है। विदेश से लौटने के बाद मोदी ने दो महत्वपूर्ण अध्यादेश पर चर्चा करने के लिए कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाई। एक अध्यादेश छोटी बच्चियों से रेप करने के वाले दोषियों को मृत्यदंड देने संबधित था। दूसरा अध्यादेश सदिंग्ध अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के प्रवाध संबधित था, जो कि अपराधी देश से भाग गए।
POCSO ACT में इन बदलावों को मिली मंजूरी………
1.महिलाओं के साथ बलात्कार की सात साल की सजा को बढ़ाकर 10 साल तक की सजा का प्रावधान ।
2.12 साल से अधिक और 16 साल की लड़कियों से रेप के मामले में सजा को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल ।
3.12 साल से अधिक और 16 साल से कम उम्र की लड़की से गैंगरेप के मामले में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान ।
4.रेप के मामलों की जांच दो महीने के अंदर करनी होगी पूरी
5.रेप के मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की समय सीमा छह महीने ।
6.12 साल से अधिक और 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप या गैंगरेप के मामले में आरोपियों को अग्रिम जमानत देने का कोई प्रावधान नहीं
7.अदालत 12 साल से अधिक और 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप के मामले में जमानत पर फैसला लेने से 15 दिन पहले लोक अभियोजक और पीड़िता के रिप्रेजेंटेटिव को देना होगा नोटिस।
क्या है POCSO ACT……
इसका अर्थ होता है, प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012 ।
इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों पर कार्यवाही की जाती है।
बच्चों के साथ की जाने वाली लैंगिक उत्पीड़न के तहत अलग-अलग सजा का प्रावधान है।
पुराने कानून के मुताबिक किसी बच्चे के साथ दुष्कर्म होता है तो उसके दोषी को सात साल की सजा से लेकर उम्रकैद और अर्थदंड लगाया जा सकता था।
1.18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का सेक्सुअल बर्ताव इस कानून के दायरे में आता है ये कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है।
2. इस एक्ट के तहत बच्चों को सेक्सुअल असॉल्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से प्रोटेक्ट किया गया है।
3. 2012 में बने इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है।
4.पोक्सो कनून के तहत सभी अपराधों की सुनवाई, एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चे के माता पिता या जिन लोगों पर बच्चा भरोसा करता है, उनकी मौजूदगी में सुनवाई का प्रावधान है।
5. अगर कोई शख्स किसी बच्चे के शरीर के किसी भी हिस्से में प्राइवेट पार्ट डालता है तो ये सेक्शन-3 के तहत अपराध है. इसके लिए धारा-4 में सजा तय की गई है।
6. अगर अपराधी ने कुछ ऐसा अपराध किया है जो कि बाल अपराध कानून के अलावा किसी दूसरे कानून में भी अपराध है तो अपराधी को सजा उस कानून में तहत होगी जो कि सबसे सख्त हो।
7. अगर कोई शख्स किसी बच्चे के प्राइवेट पार्ट को टच करता है या अपने प्राइवेट पार्ट को बच्चे से टच कराता है तो धारा-8 के तहत सज़ा होगी।
8. अगर कोई शख्स गलत नियत से बच्चों के सामने सेक्सुअल हरकतें करता है, या उसे ऐसा करने को कहता है, पोर्नोग्राफी दिखाता है तो 3 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
9. इस अधिनियम में ये भी प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति ये जानता है कि किसी बच्चे का यौन शोषण हुआ है तो उसके इसकी रिपोर्ट नजदीकी थाने में देनी चाहिए, यदि वो ऐसा नही करता है तो उसे छह महीने की कारावास की सज़ा होगी।
10.अधिनियम में ये भी कहा गया है कि बच्चे के यौन शोषण का मामला घटना घटने की तारीख से एक साल के भीतर निपटाया जाना चाहिए।
