बता दें कि कोरोना में जीवन रक्षक माने जा रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते आरोपियों को लाखों की घूस लेकर छोड़ दिया था। निलंबित हुए सब इंस्पेक्टरों के नाम एमडी अहिरवार और हरिकिशन वर्मा बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो अभी इस मामले में जांच जारी है जिसके बाद कुछ और पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
भोपाल/मध्यप्रदेश।
कोरोना के कहर के बीच इस मुश्किल दौर में कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने इंसानीयत जैसी बातों को कहीं हाशिए पर ले जाकर छोड़ दिया है और इस आपदा को अवसर के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। हालिया मामला मध्यप्रदेश के भोपाल से है। जहाँ राजधानी क्राइम ब्रांच के दो सब इंस्पेक्टर को लेनदेन के आरोप के निलंबित कर दिया गया। दोनों सब इंस्पेक्टर पर आरोप है कि कोलार पुलिस के हाथ लगे रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वाले आरोपित में से एक आरोपित को हिरासत में लेने के बाद लेनेदेन कर छोड़ दिया गया था। एक सब इंस्पेक्टर भूमिका अभी और संदिग्ध मिली है।
रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते तीन आरोपित को गिरफ्तार किया
हम बता दें कि कोलार पुलिस ने रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते तीन आरोपित को गिरफ्तार किया है। जिसमें एक आरोपित आकर्ष सक्सेना 18 अप्रैल को ही क्राइम ब्रांच के हाथ लग गया था। उसके साथ एक और मेडिकल स्टोर का संचालक था। जिसे क्राइम ब्रांच ने रेमडेसिविर के साथ हिरासत में लिया था,लेकिन दोनों आरोपियों को सब इंस्पेक्टर एमडी अहिरवार और हरिकिशन वर्मा ने लाखों रुपए लेकर छोड़ दिया था।
जाँच के बाद कार्यवाही
इसके बाद मामले में जांच के बाद एसपी मुख्यालय रामजी श्रीवास्तव ने जांच के सब इंस्पेक्टर एमडी अहिरवार और सब इंस्पेक्टर हरिकिशन वर्मा को निलंबित कर दिया गया है। एक और सब इंस्पेक्टर की भू्मिका संदिग्ध मिली है। उसकी जांच अभी जारी है, इन पुलिस कर्मियों ने कितना लेनदेन किया था। इसके लिए पुलिस अब दोबारा आकर्ष को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।
आईटी मैनेजर है राजदार

इधर, जेके अस्पताल के आईटी मैनेजर आकाश दुबे (Akash Dubey) की तलाश दूसरे दिन भी जारी रही। आरोपी आकाश दुबे ही मरीजों को आवंटित इंजेक्शन की बजाय स्लाइन चढ़ाकर उसे बेचने के लिए बाजार में भेजता था। आकाश दुबे का अस्पताल में काफी दखल भी है। वह कई राज जानता भी है। इसलिए उसको बचाने के लिए राजनीतिक कोशिशें शुरु हो गई है। दरअसल, अस्पताल प्रबंधन को लगता है कि आकाश दुबे के खुलासे से उसकी साख पर बट्टा भी लगेगा। उल्लेखनीय है कि 13 मई को कोलार थाना पुलिस ने दिलप्रीत सलूजा (Dilprit Saluja), अंकित सलूजा (Ankit Saluja) और आकर्ष सक्सेना (Akarsh Saxena) को गिरफ्तार किया था। तीनों ने कबूला था कि एक महीने में आकाश दुबे से वे करीब 15 रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीद चुके थे।
