भोपाल/मध्यप्रदेश…………..
मध्यप्रदेश की पुलिस भी गजब है। डीजीपी के तो क्या कहने। अपहरण के लिए लड़कियों की आजादी के जिम्मेदार ठहराने वाले मध्यप्रदेश के डीजीपी वीके सिंह ने एक और अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। इस फरमान के बाद मध्यप्रदेश की पुलिस पूरे देश में इकलौती ऐसी पुलिस हो जाएगी जो मुजरिमों की जाति पूछकर पिटाई करेगी। अगर मुजरिम दलित होगा तो उसे पुलिस कम पिटेगी। दरअसल थानों में अब एससी-एसटी वर्ग के साथ नरम रवैया अपनाया जाएगा। उनके साथ कोई दुर्व्यवहार या मारपीट नही की जाएगी। अगर ऐसी शिकायत मिलती है तो इसकी जिम्मेदारी उस जिले के एसपी की होगी। इसके लिए एमपी के डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी को एडवाइज़री जारी की है और एससी-एसटी वर्ग के साथ थानों में सतर्कता बरतनें को कहा है।
जाति के आधार पर पुलिस हिरासत में व्यवहार करने के डीजीपी वी के सिंह के आदेश पर पुलिस मुख्यालय कायम है। PHQ से बुधवार देर शाम एक नया बयान जारी हुआ है। उसमें लिखा है कि डीजीपी ने SC-ST आयोग के निर्देश का पालन किया है और उसमें कुछ भी ग़लत नहीं है।
पुलिस मुख्यालय के एआईजी आशुतोष प्रताप सिंह ने कहा कि आदेश में कोई गलत बात नहीं लिखी है।एसटी-एससी आयोग के डायरेक्शन का पालन अलीराजपुर की घटना को लेकर किया गया है। पुलिस अधिकारियों को सभी लोगों के लिए विधि संगत निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा आदेश को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। आयोग ने तीन डायरेक्शन दिए थे, जिनमें से एक डायरेक्शन के तहत सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
क्या है पूरा मामला……………..
डीजीपी वी के सिंह ने 4 नवंबर को प्रदेश के पुलिस अधिकारियों को एक निर्देश जारी किया था। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को विधि संगत प्रावधानों के अधीन आवश्यक होने पर ही हिरासत में लेने और पुलिस हिरासत में में कोई अभद्रता व्यवहार, मारपीट ना करने की हिदायत थी।
क्या है डीजीपी के पत्र में……………..
डीजीपी वी के सिंह ने पत्र में लिखा था कि कुछ ऐसी घटनायें प्रकाश में आई हैं, जिसमें पुलिस हिरासत के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के व्यक्तियों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की गयी इन घटनाओं पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने गंभीर आपत्ति व्यक्त की है। भारतीय संविधान एवं विधि के अधीन किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से केवल कानूनन ही वंचित किया जा सकता है। विधि संगत प्रावधानों के अधीन आवश्यक होने पर ही हिरासत में लेने और पुलिस हिरासत में में कोई अभद्रता व्यवहार, मारपीट ना करने की हिदायत थी। उन्होंने आगे लिखा था कि इस आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए। ताकि आगे फिर कभी इस तरह की घटना ना हों।

गृहमंत्री को आदेश की जानकारी नही…………..
वहीं, डीजीपी के इस आदेश से मध्यप्रदेश के गृहमंत्री बाला बच्चन पूरी तरह से अनजान हैं। उन्होंने ने कहा कि मुझे इस चीज की जानकारी नहीं है। किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगी। इस संबंध में मैं डीजीपी से चर्चा करूंगा। जाति पूछकर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। अगर ऑर्डर ऐसा है तो मैं देखता हूं। आपको बता दें कि पिछले दिनों जब बाला बच्चन ने एक बैठक बुलाई थी तो उसमें भी डीजीपी नहीं पहुंचे थे।
आदेश का विरोध शुरू…………..
मध्यप्रदेश में डीजीपी के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। करणी सेना ने मध्यप्रदेश पुलिस को चेतावनी दी है कि आदेश को वापस लें नहीं तो इसके खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। इसका साथ ही बीजेपी भी सरकार के फैसले पर सवाल उठा रही है। क्या प्रदेश की पुलिस मुजरिमों को भी जाति के आधार पर बांटकर कार्रवाई करेगी। हालांकि इस ऑर्डर पर अभी तक डीजीपी की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
