“मध्यप्रदेश में 15 सालों से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस किसी भी कीमत पर सरकार बनाना चाहती है दूसरी तरफ बीजेपी भी जीत का सिलसिला जारी रखना चाहती है ऐसे में दोनों ही पार्टी जिताऊ उम्मीदवार पर ही दांव लगाएगी”
भोपाल/मध्यप्रदेश…….
मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश और पार्टी द्वारा सर्वे के बाद बीजेपी और संगठन जिताऊ उम्मीदवारों को ही टिकट देने के फॉर्मूले पर काम कर रही है सूत्रों के मुताबिक बीजेपी की इंटर्नल रिपोर्ट में मौजूदा कई मंत्रियों का परफॉर्मेंस ठीक नहीं है हैरत की बात तो यह है कि पिछली विधानसभा चुनाव में कम अंतर से चुनाव जीतने के बावजूद भी अपने-अपने क्षेत्रों में माननीयों की पकड़ बहुत कमजोर है।
बीजेपी प्रवक्ता ने बताया……
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल भी गोलमोल तरीके से मंत्रियों के टिकट कटने की बात कह रहे हैं उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी और संगठन जीतने वाले प्रत्याशी को ही चुनता है साथ ही, उन्होंने कहा कि संगठन और निजी कंपनियों के सर्वे के जरिए जनप्रतिनिधियों का आकलन करने के बाद टिकट दिया जाता है बताया जा रहा है कि कम अंतर से जीते विधायकों के टिकट पर भी खतरा मंडरा रहा है।
दरअसल,अपनी विधानसभा सीट पर कमजोर पकड़ होने की वजह से इन नौ मंत्रियों की टिकट कटने की चर्चा राजनीति गलियारों में तेज हो गई है सूत्रों ने बताया कि बीजेपी की इंटरनल रिपोर्ट में भी इन माननीयों की खराब परफॉर्मेंस का जिक्र किया गया है।
इन मंत्रियों का कट सकता है टिकट……
1-माया सिंह
जीत का अंतर-1147
2-रुस्तम सिंह
जीत का अंतर-1704
3-ललिता यादव
जीत का अंतर-2217
4-गौरीशंकर बिसेन
जीत का अंतर-2500
5-सूर्यप्रकाश मीना
जीत का अंतर-3158
6-जयंत मलैया
जीत का अंतर-4953
7-नारायण सिंह कुशवाहा
जीत का अंतर-5993
8-बालकृष्ण पाटीदार
जीत का अंतर-6825
9-संजय पाठक(कांग्रेस से बीजेपी में आए.)
जीत का अंतर-929
दूसरी ओर बीजेपी के साथ कांग्रेस के भी कई विधायक ऐसे हैं, जिनका जीत का अंतर पांच हजार मतों से कम रहा है कांग्रेस का दावा है कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी 80 टिकटों पर बदलाव करेगी, लेकिन कांग्रेस अपने घर में झांककर देखे तो उसके भी कई विधायक कम अंतर से जीतने और खराब परफॉर्मेंस की वजह से डेंजर जोन में आ गए हैं।
