भोपाल/मध्यप्रदेश……
दलित संगठनों के भारत बंद के दौरान ग्वालियर चंबल और सागर में हुए उपद्रव का ठीकरा अफसरों के सिर फूटा जिन जिलों में ज्यादा हिंसा और जान माल की हानि हुई है, वहां के स्थानीय नेता एवं कुछ जिलों के प्रभारी मंत्रियों ने पुलिस-प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
जिसके चलते सरकार ने क्षेत्र में शांति स्थापित होते ही भिंड, मुरैना, ग्वालियर, अशोकनगर, सागर एवं भोपाल जिलों में पुलिस एवं प्रशासन के अफसरों के थोक में तबादलों की लिस्ट जारी करदी।
राज्य शासन द्वारा राज्य पुलिस सेवा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और उप पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों के थोक में तबादले किये हैं।
शुक्रवार देर शाम तबादले आदेश जारी किये गए हैं
2 अप्रैल को दलित संगठन के भारत बंद के दौरान प्रदेश भर में हुई हिंसा के बाद राज्य सरकार ने आज पुलिस महकमे में बड़ी सर्जरी की है।
इस सर्जरी में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, बालाघाट, उज्जैन, होशंगाबाद समेत अन्य जिलों में सालों से जमे पुलिस अधिकारियों को इधर से उधर किया है खासकर उन जिलों में बड़ा फेरबदल किया गया है जहां हिंसा भड़की थी।
दलित संघठनों के प्रदर्शन में भड़की हिंसा बनी कारण…….
पुलिस विभाग में इस फेरबदल को दलित संगठनों के आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है साथ ही इंटेलिजेंस द्वारा हिंसा को लेकर सौंपी गई रिपोर्ट में माना गया है कि शहरों में सालों से जमे अधिकारी कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम साबित नहीं हुए यही कारण था कि सरकार ने भोपाल,इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन में जमे ताकतवर और अशुद्ध अफसरों को हटा दिया है।








