“बता दें कि प्रशासन की इस कार्यवाही से वे अस्पताल संचालक भी डरे हुए हैं जिनको दिए नोटिस की अवधि ख़त्म हो गई है क्योंकि?? प्रशासन का बुलडोजर उनके यहाँ कभी भी चल सकता है ये चिंता उन्हें सता रही है”
ग्वालियर/मध्यप्रदेश…………….
गरीबों की बद्दुआ एवं प्रशासन की नाराजगी सहारा हॉस्पिटल को भारी पड़ी। प्रशासन और नगर निगम ने मिलकर शुक्रवार की दोपहर को कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान कई बार प्रशासन और अस्पताल के डॉक्टर, मरीज व नर्स की आपस में झड़प भी देखी गई। साथ ही कई बार डॉक्टर और स्टाफ नर्स ने कार्रवाई न करने की गुहार भी लगाई लेकिन प्रशासन ने एक नहीं सुनी और कार्रवाई कर दी। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस प्रशासन के अधिकारी और फोर्स मौजूद रहा। दरअसल,मध्यप्रदेश का ग्वालियर जिला प्रशासन अब भू माफियाओं के खिलाफ एक्शन के मूड में है। इसी कड़ी में आज ग्वालियर में बहुचर्चित डॉक्टर ए एस भल्ला के सहारा हॉस्पिटल पर बड़ी कार्रवाई प्रशासन ने की है। प्रशासन ने हॉस्पिटल को अतिक्रमण बताते हुए उसके कई हिस्सों को तोड़ दिया है। तुड़ाई शुरु होते ही सहारा अस्पताल में भर्ती मरीजों को आनन-फानन में दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है।
क्या है मामला……………….
प्राप्त जानकारी के अनुसार,पिछले महीने जिला प्रशासन ने ग्वालियर के लगभग 18 से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल और नर्सिंग होम्स को नोटिस जारी किए थे। नोटिस की समय सीमा आज खत्म हो गई है और पहली कार्रवाई सहारा हॉस्पिटल ग्रुप पर ही की गई है। जिला प्रशासन की टीम सहारा अस्पताल की तुड़ाई करने पहुंची तो सहारा अस्पताल के कर्मचारियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान अस्पताल स्टॉफ ने पुलिस से झूमा झटकी भी की, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने अस्पताल में अपनी कार्रवाई जारी रखी और अस्पताल के मेन गेट और छज्जे को ढहा दिया।
रहने के लिए किराये पर लिया और फिर हॉस्पिटल बना दिया…………
सहारा अस्पताल की बिल्डिंग बृजमोहन परिहार की है, जिसे डॉ. भल्ला ने रहने के लिए 1999 में किराए पर लिया था, लेकिन बाद में इसे अस्पताल में तब्दील कर लिया। इस जमीन और बिल्डिंग के मालिकाना हक को लेकर भी परिहार और ड़ॉ. भल्ला में विवाद चल रहा है। कार्रवाई के दौरान ही जिला अदालत से सहारा अस्पताल के मालिक को 16 तारीख तक का स्टे मिल गया है। इस अवधि में मरीजों को यहां से शिफ्ट करना है।
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