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लोकायुक्त ने जिला अस्पताल के रिश्वतखोर सर्जन सुनील यादव को रंगे हाथों धर दबोचा

बता दें कि जिला अस्पताल में इस कदर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित है कि कुछ दवाईयों को छोड़कर पूरा इलाज मरीज को रूपए खर्च ने पड़ रहे है। पिछले चार माह में लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने जिला अस्पताल में अब तीन चिकित्सक पर कार्रवाई हो चुकी है। सबसे डॉ मनोज मुराली, डॉ अशोक शर्मा और सीएस डॉ सुनील यादव लोकायुक्त ने मामला दर्ज किया है। इसके अलावा मंडला में एक प्रबंधक और पटवारी को भी पकड़ा गया है।



मंडला/मध्यप्रदेश………..


मध्यप्रदेश के मंडला जिला अस्पताल में सर्जन के पद पर पदस्थ डॉ. सुनील यादव को लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते उनकी क्लीनिक से रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।


क्या है पूरा मामला………….


प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ.यादव ने सोनू लाल नरेती (65) निवासी गांव मुडाडीह जिला मंडला के हार्निया के ऑपरेशन के लिए 10 हजार रुपए की मांग की थी। इसके बाद 6 हजार रुपए देना निश्चित हुआ। मंगलवार दोपहर रानी अवंती बाई वार्ड स्थित उनकी क्लीनिक में रुपए लेते समय डॉ. यादव को लोकायुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया।

शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार नरेती ने शिकायत में बताया था कि उसके पिता सोनू नरेती को पिछले कुछ दिनों से पेट में तकलीफ थी। 13 सितंबर को जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. सुनील यादव से चेकअप कराया तो उन्होंने ऑपरेशन कराने के लिए कहा और इसके बदले 10 हजार रुपए भी देने के लिए कहा। आखिर में 6 हजार पर राजी हो गए।

प्रमोद ने बताया कि लगातार उसके पिता की हालत बिगड़ रही थी। दूसरी ओर सर्जन डॉ. सुनील यादव रुपए की मांग पर अड़े थे। उन्हें इस बात के लिए राजी किया कि ऑपरेशन होते ही वह 6 हजार रुपए दे देगा। 16 सितंबर को डॉ. यादव ने सोनू नरेती का जिला अस्पताल में ऑपरेशन किया और 17 सितंबर को ऑपरेशन के बदले 6 हजार रुपए लेकर अपनी क्लीनिक में प्रमोद को बुलाया, जहां डॉ. यादव को लोकायुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया। डॉ. सुनील यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।


आयुष्मान कार्डधारी से 10 हज़ार की मांग………


जिला अस्पताल मंडला में पदस्थ सीएस डॉ सुनील यादव स्वास्थ्य सेवा और उपचार के लिए वेतन के अलावा गरीब मरीजो से अलग से शुल्क के नाम पर वसूली कर रहे है। प्रमोद कुमार ने बताया कि 13 सितंबर को उसने पिता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने जब बताया कि पिता का ऑपरेशन होगा तो इसके बाद उसने जिला अस्पताल में ही आयुष्मान कार्ड बनवा लिया। यह कार्ड लेकर पहले तो डॉ. यादव से आयुष्मान योजना के तहत ऑपरेशन करने के लिए कहा लेकिन डॉ. यादव ने कहीं ओर से ऑपरेशन करा लेने के लिए कह दिया। प्रमोद का आरोप है कि कई और भी मरीज जिला अस्पताल में भर्ती हैं जिनसे करीब-करीब इतनी ही राशि लेकर डॉ. यादव ने ऑपरेशन किए हैं लेकिन वे मजबूरी में नहीं बताते।

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